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प्यार का जश्न - हिन्दी शायरी

प्यार का जश्न - हिन्दी शायरी

प्यार का जश्न नई तरह मनाना होगा
गम किसी दिल में सही गम को मिटाना होगा
काँपते होंटों पे पैमाना-ए-वफा क्या कहना
तुझ को लाई है कहाँ लग्जिश-ए-पा क्या कहना
मेरे घर में तिरे मुखड़े की जिया क्या कहना
आज हर घर का दिया मुझ को जलाना होगा
रूह चेहरों पे धुआँ देख के शरमाती है
झेंपी झेंपी सी मिरे लब पे हँसी आती है
तेरे मिलने की खुशी ददॆ बन जाती है
हम को हँसना है तो औरों को हँसाना होगा
प्यार का जश्न - हिन्दी शायरी
सोई सोई आँखों में छलकते हुए जाम
खोई खोई हुई नजरों में मोहब्बत का पयाम
लब शीरीं पे मिरी तिश्ना-लबी का इनआम
जाने इनआम मिलेगा कि चुराना होगा
मेरी गदॆन में तिरी सनदली बाहों का ये हार
अभी आँसू थे इन आँखों में अभी इतना खुमार
मैं न कहता मिरे घर में भी आएगी बहार
शतॆ इतनी थी कि पहले तुझे आना होगा..!
प्यार का जश्न - हिन्दी शायरी

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